महिलाओं व नाबालिग पर अपराध को लेकर राष्ट्रपति मुर्मु का सख्त और निर्णायक रुख
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने महिलाओं और नाबालिगों पर अपराधों के खिलाफ शून्य सहनशीलता नीति अपनाने का स्पष्ट संदेश दिया।
दोषियों के लिए कड़ी सजा, त्वरित न्याय और पीड़ितों की गरिमा व सुरक्षा सुनिश्चित करने पर राष्ट्रपति ने जोर दिया।
राष्ट्रपति ने समाज, सरकार और न्यायिक संस्थाओं से मिलकर अपराध के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने का आह्वान किया।
दिल्ली/ महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सख्त और साहसिक रुख अपनाया है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस प्रकार के अपराध न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। उनका मानना है कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि नाबालिगों और महिलाओं पर होने वाले अपराध देश के संविधान में प्रदत्त सम्मान, समानता और जीवन के अधिकार के विरुद्ध हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ऐसे मामलों में देरी से न्याय मिलना पीड़ितों के लिए गहरी पीड़ा का कारण बनता है। इसी कारण उन्होंने त्वरित जांच, प्रभावी अभियोजन और समयबद्ध न्याय प्रक्रिया पर जोर दिया।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने दोषियों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी को खारिज करते हुए कहा कि कठोर दंड और कानून का भय ही अपराधियों को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने जांच एजेंसियों और न्यायिक तंत्र से अपेक्षा जताई कि वे पीड़ितों की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यह भी कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा केवल कानून से संभव नहीं है, इसके लिए समाज की सोच में बदलाव जरूरी है। उन्होंने परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों से आग्रह किया कि वे जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित माहौल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
राष्ट्रपति का यह बोल्ड निर्णय और सख्त संदेश ऐसे समय आया है जब देश में महिला और बाल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। उनका स्पष्ट संदेश है कि अपराधियों के लिए कोई स्थान नहीं है और पीड़ितों को हर हाल में न्याय, सम्मान और संरक्षण मिलना चाहिए।